लखनऊ में आर्किटेक्ट एम्पैनलमेंट विवाद अब तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के आर्किटेक्ट्स ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की प्रस्तावित एम्पैनलमेंट प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आर्किटेक्ट्स का कहना है कि वे पहले से Council of Architecture (COA) में पंजीकृत हैं। ऐसे में अलग से एम्पैनलमेंट की अनिवार्यता पेशेवर कामकाज को जटिल बना सकती है। LDA ने अप्रैल में आर्किटेक्ट्स के एम्पैनलमेंट से जुड़ा प्रस्ताव रखा था। इसके पीछे भवन मानचित्र स्वीकृति को बेहतर बनाने और बिल्डिंग नियमों का पालन मजबूत करने की बात कही गई। हालांकि, पेशेवर संगठनों का मानना है कि नई व्यवस्था से अतिरिक्त प्रक्रिया और अनावश्यक बाधाएं पैदा हो सकती हैं।
आर्किटेक्ट एम्पैनलमेंट विवाद पर COA की आपत्ति
Council of Architecture ने भी प्रस्तावित बदलाव पर चिंता जताई है। आर्किटेक्ट डॉ. केके अस्थाना के अनुसार, COA में पंजीकृत आर्किटेक्ट लंबे समय से विकास प्राधिकरणों के साथ भवन मानचित्र स्वीकृति का काम करते रहे हैं। आर्किटेक्ट संगठनों का कहना है कि सरकार को नियम स्पष्ट करने चाहिए। यदि उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे राज्य सरकार के सामने मामला उठाने के साथ कानूनी विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं।
NITIN KUMAR | RASHTRIYA MISSION
FAQ
सवाल: आर्किटेक्ट एम्पैनलमेंट विवाद क्या है?
जवाब: यह LDA की प्रस्तावित एम्पैनलमेंट प्रक्रिया और पहले से COA में पंजीकृत आर्किटेक्ट्स के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत से जुड़ा विवाद है।
सवाल: आर्किटेक्ट्स की मुख्य मांग क्या है?
जवाब: वे पारदर्शी नियम, समान अवसर और मौजूदा पंजीकरण व्यवस्था को ध्यान में रखकर फैसला चाहते हैं।
