आरक्षित सीटों का रोटेशन: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, संसद की भूमिका को बताया अहम

आरक्षित सीटों का रोटेशन सुप्रीम कोर्ट फैसला 2026आरक्षित सीटों के रोटेशन पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, याचिका खारिज।

नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा और विधानसभा की अनुसूचित जाति (SC) तथा अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के रोटेशन संबंधी याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था में बदलाव के लिए विधायी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।

आरक्षित सीटों का रोटेशन: क्या है पूरा मामला?

यह मामला उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की कादीपुर विधानसभा सीट से जुड़ा है। याचिकाकर्ता जगदीश सिंह ने लंबे समय से एक ही निर्वाचन क्षेत्र के आरक्षित रहने पर सवाल उठाया था।

उनका तर्क था कि आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में समय-समय पर बदलाव होना चाहिए। इससे विभिन्न क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के अवसर बढ़ सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने माना कि चुनावी आरक्षण व्यवस्था में बदलाव के लिए संसद की विधायी भूमिका महत्वपूर्ण है।

आरक्षित सीटों का रोटेशन लागू करने के लिए निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया।

संविधान में क्या है प्रावधान?

संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 में लोकसभा तथा विधानसभाओं में SC/ST वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है।

निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण परिसीमन संबंधी कानूनों के अनुसार होता है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: आरक्षित सीटों का रोटेशन क्या है?

उत्तर: यह ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें निर्धारित नियमों के अनुसार आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों को बदला जाता है।

प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

उत्तर: अदालत ने रोटेशन संबंधी याचिका खारिज करते हुए विधायी प्रक्रिया की भूमिका पर जोर दिया।

प्रश्न 3: क्या आरक्षित सीटों में तत्काल बदलाव होगा?

उत्तर: नहीं। इस फैसले से मौजूदा आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है।

NITIN KUMAR | RASHTRIYA MISSION

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