लखनऊ, 11 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यूपी मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशन 2026 को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के क्षेत्रों में भवन निर्माण और नक्शा पास कराने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं।
यूपी मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशन 2026 में क्या बदलेगा?
नए नियमों के तहत नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया गया है। निर्धारित श्रेणियों में भवन मानचित्र की मंजूरी के लिए 60 दिन की समयसीमा का प्रावधान है।
इसके अलावा 45 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों के किनारे एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) की अधिकतम सीमा हटाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, भवन की ऊंचाई अन्य सुरक्षा और तकनीकी मानकों के अधीन रहेगी।
छोटे प्लॉट मालिकों को मिलेगी राहत
यूपी मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशन 2026 में 100 वर्गमीटर तक के आवासीय और 30 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक भूखंडों के लिए स्व-प्रमाणीकरण की सुविधा का प्रावधान है। पात्र निर्माण के लिए निर्धारित शर्तों का पालन जरूरी होगा।
रियल एस्टेट बाजार पर क्या होगा असर?
सरकार का उद्देश्य भूमि का बेहतर उपयोग, निजी निवेश और नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना है।
इससे आवासीय परियोजनाओं, व्यावसायिक भवनों और औद्योगिक निर्माण को गति मिल सकती है।
हालांकि, खरीदारों और बिल्डरों को निर्माण से पहले संबंधित प्राधिकरण के लागू नियमों की जांच करनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: यूपी मॉडल बिल्डिंग रेगुलेशन 2026 को किसने मंजूरी दी?
उत्तर: उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 9 अक्टूबर 2026 को इसे मंजूरी दी।
प्रश्न 2: क्या नक्शा पास कराना आसान होगा?
उत्तर: हां, पात्र भवनों के लिए मंजूरी प्रक्रिया सरल करने और समयसीमा तय करने के प्रावधान हैं।
प्रश्न 3: किन क्षेत्रों को फायदा होगा?
उत्तर: मुख्य रूप से औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अधीन आने वाले क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
NITIN KUMAR | RASHTRIYA MISSION
