नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने त्रिशूली नदी घाटी के कई इलाकों की तस्वीर बदल दी है। नेपाल बाढ़ तबाही के बाद कई बस्तियों में घर, दुकानें, सड़कें और बिजली परियोजनियां मलबे में तब्दील हो गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। 26 अगस्त को आए तेज जलप्रवाह के साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी, चट्टानें और मलबा नीचे की ओर बहा। इससे त्रिशूली और उससे जुड़ी नदी घाटियों में भारी नुकसान हुआ। कई स्थानों पर पहले मौजूद बस्तियों की जगह अब पत्थर और सख्त होती मिट्टी दिखाई दे रही है। नुवाकोट जिले के देवीघाट में भी कई परिवारों ने अपना घर और रोजगार गंवाया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी इतनी तेजी से आया कि सामान निकालने का समय तक नहीं मिला। लोगों ने सबसे पहले अपने परिवार की जान बचाने की कोशिश की।
नेपाल बाढ़ तबाही का असर ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ा है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 12 बिजली उत्पादन सुविधाएं प्रभावित हुईं और लगभग 430 मेगावाट उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा। सौर ऊर्जा और जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। भारतीय, नेपाली और चीनी विशेषज्ञ प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। अब प्रशासन के सामने राहत सामग्री, अस्थायी आश्रय और आजीविका उपलब्ध कराने के साथ बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण की चुनौती है।
Byline: NITIN KUMAR | RASHTRIYA MISSION
FAQ
नेपाल में बाढ़ कब आई?
रिपोर्ट के अनुसार, विनाशकारी बाढ़ 26 अगस्त 2026 को आई।
नेपाल बाढ़ से कौन-सा क्षेत्र ज्यादा प्रभावित हुआ?
त्रिशूली नदी घाटी और उससे जुड़े कई क्षेत्रों में गंभीर नुकसान की खबर है।
बिजली उत्पादन पर कितना असर पड़ा?
रिपोर्ट के मुताबिक करीब 430 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।
