Nepal Tibet Flood: 600 से ज्यादा मौतें, हजारों लापता; नई ग्लेशियल झील बनी खतरा

Nepal Tibet Flood 2026 के बाद नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बाढ़, मलबे और ग्लेशियल झील के खतरे के बीच चल रहा राहत एवं बचाव अभियान।Nepal Tibet Flood के बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी। image generated by ai

Nitin Kumar | Rashtriya Mission

नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान फिर तेज कर दिया गया है। Nepal Tibet Flood में मृतकों की संख्या 600 के पार पहुंचने की सूचना है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, शनिवार तक देश में 626 लोगों की मौत की सूचना थी। वहीं, तिब्बत में भी कई लोगों की मौत और सैकड़ों के लापता होने की खबर है।

Nepal Tibet Flood के बाद नई झील से बढ़ी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, हिमालय में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद यह आपदा शुरू हुई। बर्फ, चट्टानों और मलबे का तेज बहाव नदी में पहुंचा। इसके बाद नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जैसे इलाके गंभीर रूप से प्रभावित हुए। इस Nepal Tibet Flood के बाद ग्लेशियर टूटने वाली जगह पर एक नई झील भी बन गई है। विशेषज्ञों ने इसके प्राकृतिक अवरोध की स्थिरता को लेकर चिंता जताई है। इसी खतरे के कारण बचाव अभियान कुछ समय के लिए रोका गया था। जोखिम का आकलन करने के बाद अभियान दोबारा शुरू किया गया। नेपाल ने राहत और खोज अभियान में विशेषज्ञ सहायता के लिए भारत और चीन से मदद मांगी है। भारत सहित कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से सहायता पहुंचने की भी जानकारी है। हालांकि, दुर्गम इलाकों में मलबा और टूटी सड़कें राहत कार्यों को मुश्किल बना रही हैं।

FAQ

Nepal Tibet Flood कैसे आया?
रिपोर्ट के अनुसार, ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के बाद पानी, चट्टान और मलबे का तेज बहाव नीचे आया।

क्या बाढ़ का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है?
नहीं। नई बनी ग्लेशियल झील की स्थिरता पर निगरानी रखी जा रही है और स्थिति बदल सकती है।

क्या भारत नेपाल की मदद कर रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने भारत और चीन से विशेषज्ञ बचाव सहायता मांगी है।

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