उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिव्यांग आरक्षण भर्ती से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने स्पाइनल दिव्यांगता की नई मान्यता प्राप्त श्रेणियों को आरक्षण व्यवस्था में शामिल करने के मुद्दे पर ग्रुप-C भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई है। इस आदेश से संबंधित भर्ती में शामिल उम्मीदवारों के लिए नई स्थिति पैदा हो गई है।
दिव्यांग आरक्षण भर्ती पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?
उपलब्ध न्यायिक रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालय ने 6 अक्टूबर 2026 को मनोज सिंह कंडारी बनाम उत्तराखंड राज्य मामले में आदेश दिया। मामला स्पाइनल दिव्यांगता वाले पात्र उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ देने से संबंधित है।
याचिका में उठे मुद्दों के आधार पर अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों के पालन को महत्वपूर्ण माना। हालांकि, भर्ती दोबारा कब शुरू होगी, यह आगे की आधिकारिक कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए क्या हैं नियम?
दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34 के अनुसार, सरकारी प्रतिष्ठानों में बेंचमार्क दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्तियों के लिए कम से कम चार प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।
इसका उद्देश्य पात्र उम्मीदवारों को सरकारी रोजगार में समान अवसर उपलब्ध कराना है।
उम्मीदवारों को अब क्या करना चाहिए?
संबंधित अभ्यर्थियों को भर्ती आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अधिसूचनाएं देखनी चाहिए।
अदालत की अंतरिम रोक का अर्थ भर्ती का स्थायी रूप से रद्द होना नहीं है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: हाईकोर्ट ने किस भर्ती पर रोक लगाई है?
उत्तर: उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उत्तराखंड की ग्रुप-C भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है।
प्रश्न 2: दिव्यांग उम्मीदवारों को कितना आरक्षण मिलता है?
उत्तर: कानून के अनुसार पात्र बेंचमार्क दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए कम से कम चार प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है।
NITIN KUMAR | RASHTRIYA MISSION
