NITIN KUMAR | RASHTRIYA MISSION
म्यांमार से सटी मिजोरम सीमा पर म्यांमार ड्रग्स तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। हेरोइन और मेथाम्फेटामाइन जैसे नशीले पदार्थों की अवैध आवाजाही के कारण सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। मिजोरम की म्यांमार के साथ करीब 510 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। पहाड़, घने जंगल और दुर्गम रास्ते निगरानी को मुश्किल बनाते हैं।उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बीते आठ महीनों में 846 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की ड्रग्स जब्त होने और 930 लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि मामला छोटे तस्करों तक सीमित नहीं है।
म्यांमार ड्रग्स तस्करी में आर्थिक नेटवर्क भी चुनौती
जांच में हवाला, म्यूल बैंक खातों और संदिग्ध कंपनियों के जरिए पैसों के लेन-देन की बातें भी सामने आई हैं। कुछ रासायनिक पदार्थ भारत से म्यांमार पहुंचाए जाने और वहां उनका इस्तेमाल नशीले पदार्थ तैयार करने में होने के आरोप भी जांच का हिस्सा रहे हैं।ऐसे में म्यांमार ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए केवल सीमा पर ड्रग्स की खेप पकड़ना पर्याप्त नहीं होगा। सुरक्षा एजेंसियों को तस्करी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क, संदिग्ध बैंक खातों और सप्लाई चेन की भी जांच करनी होगी।नशीले पदार्थों का बढ़ता नेटवर्क युवाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा है। इसलिए तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान और स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है।
FAQ
म्यांमार ड्रग्स तस्करी के लिए मिजोरम सीमा संवेदनशील क्यों है?
पहाड़ी इलाके, घने जंगल और लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा निगरानी को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए क्या जरूरी है?
सीमा निगरानी के साथ वित्तीय नेटवर्क, हवाला, संदिग्ध खातों और सप्लाई चेन पर कार्रवाई जरूरी है।
