अमेरिकी मिसाइल भंडार को लेकर सामने आई एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने अमेरिकी राजनीति और रक्षा तंत्र में नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी मिसाइल भंडार: रिपोर्ट में दावा किया गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच कैंप डेविड में हुई बैठक के दौरान मिसाइलों की कमी को लेकर तीखी चर्चा हुई। हालांकि, व्हाइट हाउस और पेंटागन दोनों ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने रक्षा मंत्री से पूछा कि उन्हें अमेरिकी मिसाइल भंडार में कमी की पूरी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई। इसमें यह भी कहा गया कि लंबी दूरी की मिसाइलों और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की उपलब्धता घटने से अमेरिका की सैन्य रणनीति प्रभावित हुई है। वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट कहा कि ऐसी कोई बहस हुई ही नहीं और यह रिपोर्ट तथ्यहीन है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि लगातार सैन्य अभियानों के कारण टॉमहॉक, पैट्रियट, THAAD और ATACMS जैसी उन्नत मिसाइलों का उपयोग तेज़ी से बढ़ा है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। पेंटागन ने भी कहा कि रक्षा मंत्री ने किसी को गुमराह नहीं किया और विभाग के भीतर किसी प्रकार का गंभीर मतभेद नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक हथियारों का उत्पादन समय लेने वाली प्रक्रिया है। इसलिए यदि अमेरिकी मिसाइल भंडार पर दबाव बढ़ता है, तो भविष्य की रक्षा तैयारियों और सहयोगी देशों को मिलने वाली सैन्य सहायता पर असर पड़ सकता है। फिलहाल इस पूरे मामले में मीडिया रिपोर्ट और अमेरिकी प्रशासन के आधिकारिक बयान एक-दूसरे से अलग नजर आ रहे हैं।
Nitin Kumar | Rashtriya Mission
FAQ
1. अमेरिकी मिसाइल भंडार विवाद क्या है?
यह विवाद उस रिपोर्ट से जुड़ा है जिसमें ट्रंप और रक्षा मंत्री के बीच मिसाइलों की कमी पर कथित बहस का दावा किया गया।
2. व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है।
3. क्या पेंटागन ने भी प्रतिक्रिया दी?
हाँ, पेंटागन ने भी इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि रक्षा विभाग के भीतर कोई गंभीर मतभेद नहीं है।
4. रिपोर्ट में किन मिसाइलों का उल्लेख है?
रिपोर्ट में टॉमहॉक, पैट्रियट, THAAD और ATACMS जैसी मिसाइल प्रणालियों का जिक्र किया गया है।
