Nitin Kumar | Rashtriya Mission
उत्तर प्रदेश में घर और फ्लैट खरीदने वाले लोगों के लिए UP-RERA के नए नियम काफी अहम हैं। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने 13 जुलाई 2026 तक किए गए प्रमुख संशोधनों को समेकित किया है। इससे बिल्डर, रियल एस्टेट एजेंट और होमबायर्स एक ही जगह जरूरी नियमों को समझ सकेंगे।
नए प्रावधानों के तहत बिल्डरों को प्रोजेक्ट से जुड़े आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट की जानकारी देनी होगी। प्रोजेक्ट की तिमाही प्रगति रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। साथ ही कंपनी और वित्तीय जानकारी को UP-RERA पोर्टल पर अपडेट रखना होगा।
UP-RERA के नए नियमों में तीन बैंक खातों की व्यवस्था
प्रोजेक्ट के पैसे के लिए Collection Account, Separate Account और Transaction Account रखना होगा। खरीदारों की जमा रकम में से 70 प्रतिशत Separate Account और 30 प्रतिशत Transaction Account में ट्रांसफर करने का प्रावधान है। खातों का वार्षिक ऑडिट भी जरूरी होगा।
विज्ञापनों में UP-RERA Registration Number, QR Code, वेबसाइट, Collection Account और Project Launch Date जैसी महत्वपूर्ण जानकारी प्रमुखता से देनी होगी। वहीं रियल एस्टेट एजेंटों को रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट की जरूरत होगी।
IFMS राशि को भी अलग बैंक खाते में रखना होगा। Residents’ Association के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने के बाद यह राशि उसे ट्रांसफर करनी होगी।
FAQ
सवाल: UP-RERA के नए नियम किसके लिए हैं?
जवाब: ये नियम मुख्य रूप से बिल्डरों, होमबायर्स और रियल एस्टेट एजेंटों से जुड़े हैं।
सवाल: क्या बिल्डर खरीदार से नकद भुगतान ले सकता है?
जवाब: समेकित नियमों के अनुसार प्रोजेक्ट भुगतान नकद में लेने की अनुमति नहीं होगी।
सवाल: प्रॉपर्टी विज्ञापन में RERA नंबर देना जरूरी है?
जवाब: हां, विज्ञापन में UP-RERA Registration Number सहित निर्धारित प्रोजेक्ट जानकारी देनी होगी।
