गाजियाबाद, 31 अक्टूबर 2026। गाजियाबाद में आवासीय परियोजनाओं से जुड़े डेवलपर्स और जमीन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। गाजियाबाद हाउसिंग बोर्ड फैसला के तहत उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की आवासीय योजनाओं के आसपास की भूमि पर बेटरमेंट शुल्क समाप्त करने और लेआउट मंजूरी के लिए अलग NOC की अनिवार्यता हटाने की जानकारी सामने आई है।
इस बदलाव से रियल एस्टेट परियोजनाओं की लागत कम होने और मंजूरी प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है।
गाजियाबाद हाउसिंग बोर्ड फैसला: किन क्षेत्रों को मिलेगी राहत?
जानकारी के अनुसार, वसुंधरा, सिद्धार्थ विहार और मंडोला जैसी आवासीय योजनाओं के आसपास स्थित भूमि इस निर्णय से प्रभावित हो सकती है।
पहले संबंधित क्षेत्रों में विकास कार्यों के कारण बेटरमेंट शुल्क लागू होता था। इसके अलावा, डेवलपर्स को लेआउट स्वीकृति के लिए अलग अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना पड़ता था।
अब इन शर्तों में बदलाव से छोटे और बड़े डेवलपर्स को प्रशासनिक राहत मिल सकती है।
रियल एस्टेट बाजार और घर खरीदारों पर असर
इस निर्णय से नई आवासीय परियोजनाओं को बढ़ावा मिलने की संभावना है। हालांकि, फ्लैट और प्लॉट की कीमतों में तत्काल कमी की पुष्टि नहीं हुई है।
डेवलपर्स को भूमि उपयोग, भवन मानचित्र और अन्य जरूरी सरकारी मंजूरियां पहले की तरह प्राप्त करनी होंगी।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: बेटरमेंट शुल्क क्या है?
उत्तर: यह भूमि के आसपास विकसित सुविधाओं से संबंधित निर्धारित विकास शुल्क होता है।
प्रश्न 2: क्या सभी NOC समाप्त हो गई हैं?
उत्तर: नहीं, खबर के अनुसार संबंधित हाउसिंग बोर्ड की अलग NOC की शर्त हटाई गई है।
प्रश्न 3: क्या मकान सस्ते होंगे?
उत्तर: लागत घट सकती है, लेकिन मकानों की कीमतों में कमी निश्चित नहीं है।
NITIN KUMAR | RASHTRIYA MISSION
