देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम तस्वीर सामने आई है। ताजा UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार भारत में सिंगल टीचर स्कूल की संख्या एक लाख से अधिक हो गई है। इन स्कूलों में सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी संस्थान भी शामिल हैं। सबसे अधिक ऐसे स्कूल आंध्र प्रदेश में दर्ज किए गए हैं, जबकि झारखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश भी शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक भर्ती में देरी, सेवानिवृत्ति, इस्तीफे और दूरदराज क्षेत्रों में पदस्थापन की समस्याओं के कारण यह स्थिति बनी है।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक अनुपात अभी भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानकों के भीतर है। इसके बावजूद कई विद्यालयों में केवल एक शिक्षक होने से पढ़ाई, प्रशासन और छात्रों की व्यक्तिगत शिक्षा प्रभावित होती है। सरकार का कहना है कि राज्यों को नियमित भर्ती, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और शिक्षक आवश्यकता के वैज्ञानिक आकलन के निर्देश दिए गए हैं। समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता भी दी जा रही है ताकि सिंगल टीचर स्कूल की संख्या कम की जा सके।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नई भर्ती ही पर्याप्त नहीं होगी। शिक्षकों का संतुलित वितरण, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी नियुक्तियां भी उतनी ही जरूरी हैं। यदि राज्यों में समय पर रिक्त पद भरे जाएं तो आने वाले वर्षों में इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
रिपोर्ट: Nitin Kumar | Rashtriya Mission
FAQ (हिंदी)
प्रश्न 1: भारत में कितने सिंगल टीचर स्कूल हैं?
उत्तर: UDISE+ 2025-26 के अनुसार देश में 1,00,843 सिंगल टीचर स्कूल हैं।
प्रश्न 2: सबसे अधिक सिंगल टीचर स्कूल किस राज्य में हैं?
उत्तर: आंध्र प्रदेश 16,357 स्कूलों के साथ पहले स्थान पर है।
प्रश्न 3: इस समस्या के मुख्य कारण क्या हैं?
उत्तर: शिक्षक रिक्तियां, सेवानिवृत्ति, इस्तीफे और ग्रामीण क्षेत्रों में नियुक्ति की कमी प्रमुख कारण हैं।
