Nitin Kumar | Rashtriya Mission
उत्तर प्रदेश में UP Panchayat Election 2026 में देरी के बीच ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिन्हें प्रशासक बनाया गया है, उन्हें प्रधान के रूप में मिलने वाला मासिक मानदेय नहीं मिलेगा। पंचायती राज व्यवस्था के तहत प्रशासक बनने के साथ उनके वित्तीय अधिकार भी समाप्त हो जाते हैं। ग्राम प्रधानों को हर महीने करीब 5,000 रुपये मानदेय मिलता है। वहीं, ब्लॉक प्रमुख को लगभग 11,300 रुपये और जिला पंचायत अध्यक्ष को करीब 15,500 रुपये मानदेय मिलने की बात कही गई है। प्रशासकीय व्यवस्था लागू होने के बाद इन पदों से जुड़ा नियमित मानदेय जारी नहीं रहेगा। बचने वाली राशि ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों पर खर्च की जा सकती है।
UP Panchayat Election 2026 में देरी का मामला कोर्ट में
UP Panchayat Election 2026 में हो रही देरी का मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच चुका है। पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले में कोर्ट ने सरकार से देरी का कारण भी पूछा है। उत्तर प्रदेश में 58,213 ग्राम पंचायतें, 827 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें बताई गई हैं। ऐसे में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया ग्रामीण प्रशासन के लिए काफी महत्वपूर्ण है। आरक्षण और संबंधित सर्वे प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव कार्यक्रम को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।
FAQ
सवाल: प्रशासक बने ग्राम प्रधान को मानदेय मिलेगा?
जवाब: उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रशासक बनने के बाद प्रधान का नियमित मासिक मानदेय नहीं मिलेगा।
सवाल: पंचायत चुनाव में देरी क्यों हो रही है?
जवाब: पिछड़ा वर्ग आरक्षण और उससे जुड़ी प्रक्रिया को देरी का एक प्रमुख कारण बताया गया है।
