पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़ती Construction Cost Relief India चर्चा का केंद्र बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, समुद्री शिपिंग खर्च और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण निर्माण सामग्री लगातार महंगी हो रही है। इसका सीधा असर सीमेंट, स्टील, पीवीसी पाइप, पेंट और अन्य निर्माण उत्पादों की कीमतों पर पड़ा है।
इसी चुनौती को देखते हुए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्य रेरा (RERA) प्राधिकरणों को सलाह दी है कि वे बिल्डरों को परियोजनाओं की समयसीमा और पंजीकरण में चार महीने की अतिरिक्त राहत दें। सरकार का मानना है कि यह परिस्थिति बिल्डरों के नियंत्रण से बाहर है और खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम आवश्यक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले महीनों में आवास परियोजनाओं की लागत और बढ़ सकती है। हालांकि सरकार की यह सलाह निर्माण कार्यों को जारी रखने में मदद करेगी और अधूरी परियोजनाओं पर दबाव कम करेगी।
Nitin Kumar | Rashtriya Mission के अनुसार, यह निर्णय रियल एस्टेट उद्योग और लाखों घर खरीदारों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में निर्माण क्षेत्र की लागत और परियोजनाओं की प्रगति पर सभी की नजर रहेगी।
FAQs (हिंदी)
Q1. सरकार ने बिल्डरों को कितने महीने की राहत देने की सलाह दी है?
उत्तर: केंद्र सरकार ने RERA को बिल्डरों को 4 महीने की अतिरिक्त समयसीमा देने की सलाह दी है।
Q2. निर्माण लागत बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
उत्तर: पश्चिम एशिया युद्ध, महंगा कच्चा तेल, शिपिंग लागत और रुपये की कमजोरी प्रमुख कारण हैं।
Q3. क्या इसका असर घर खरीदने वालों पर पड़ेगा?
उत्तर: यदि निर्माण लागत बढ़ती रही तो नए घरों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
