नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट SIR विवाद में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर कानूनी सुनवाई जारी है। चुनाव आयोग ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए पुनरीक्षण प्रक्रिया का बचाव किया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आयोग के जवाब पर प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है।
सुप्रीम कोर्ट SIR विवाद में क्या हुआ?
चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े निर्णय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिए गए हैं। आयोग ने निर्णय प्रक्रिया में अनियमितता के आरोपों को खारिज किया।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुनरीक्षण के दौरान किसी योग्य नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए।
मतदाता सूची पुनरीक्षण क्यों महत्वपूर्ण?
SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन बनाना है। इसके तहत मृत मतदाताओं, स्थान बदलने वाले नागरिकों और दोहरी प्रविष्टियों की जांच की जाती है।
हालांकि, इस प्रक्रिया में निष्पक्षता और कानूनी नियमों का पालन जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट SIR विवाद में इन मुद्दों पर न्यायिक विचार जारी है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को निर्धारित है।
अदालत ने अभी विवाद के मूल मुद्दों पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: SIR का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: Special Intensive Revision, यानी विशेष गहन पुनरीक्षण।
प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट ने कितने दिन का समय दिया?
उत्तर: याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन दिए गए।
प्रश्न 3: क्या सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाई है?
उत्तर: इस प्रक्रियागत आदेश में SIR पर रोक लगाने का उल्लेख नहीं है।
NITIN KUMAR | RASHTRIYA MISSION
