नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026। दिल्ली दंगा साजिश केस में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। दोनों ने लंबे समय से जारी हिरासत और मुकदमे की धीमी सुनवाई को राहत का आधार बनाया है।
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़े इस मामले में दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आरोप लगाए थे। हालांकि, दोनों आरोपी अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का विरोध करते रहे हैं।
दिल्ली दंगा साजिश केस में जमानत की मांग क्यों?
उमर खालिद और शरजील इमाम ने दिल्ली हाई कोर्ट के 30 सितंबर 2026 के आदेश को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को भी दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। अब बचाव पक्ष ने मुकदमे में देरी और संरक्षित गवाहों की जांच पूरी नहीं होने का मुद्दा उठाया है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
दिल्ली दंगा साजिश केस में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और UAPA के कठोर जमानत प्रावधान महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे हैं।
अदालत अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के आधार पर निर्णय करेगी।
फिलहाल नई जमानत याचिकाओं पर अंतिम राहत मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: दिल्ली दंगा साजिश केस किस वर्ष का है?
उत्तर: यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ा है।
प्रश्न 2: उमर खालिद और शरजील इमाम ने क्या मांग की है?
उत्तर: दोनों ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत देने की मांग की है।
प्रश्न 3: क्या दोनों को जमानत मिल गई है?
उत्तर: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नई याचिकाओं पर अंतिम राहत की पुष्टि नहीं हुई है।
NITIN KUMAR | RASHTRIYA MISSION
